महर्षि सुश्रुत

माना जाता है कि महर्षि सुश्रुत ने 2600 साल पहले डिलिवरी , मोतियाबिंद, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई तरह की मुश्किल सर्जरी को पूरा किया था.

ऑस्‍ट्रेलिया और भारत के बीच कई सदियों से सांस्‍कृतिक रिश्‍ते हैं, ये बात तो सबको मालूम है. लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि यहां पर प्रचीन भारतीय ऋषि का काफी सम्‍मान है. हम बात कर रहे हैं महर्षि सुश्रुत की जिन्‍हें ऑस्‍ट्रेलिया के कई डॉक्‍टर काफी सम्‍मान की दृष्टि से देखते हैं. यहां पर एक प्रतिष्ठित कॉलेज में महर्षि सुश्रुत की मूर्ति भी लगी हुई है. आइए आपको इनके बारे में बताते हैं.

ऑस्‍ट्रेलिया के सर्जन पढ़ते हैं सुश्रुत के बारे में

ऑस्‍ट्रेलिया के मेलबर्न स्थित रॉयल ऑस्‍ट्रेलिया कॉलेज ऑफ सर्जंस (RACS) में महर्षि सुश्रुत की मूर्ति लगी हुई है. यह कॉलेज उन डॉक्‍टरों को ट्रेनिंग देने के लिए जाना जाता है जो सर्जरी में महारत हासिल करना चाहते हैं. इस कॉलेज में ऑस्‍ट्रेलिया के अलावा न्‍यूजीलैंड के सर्जंस को भी ट्रेनिंग दी जाती है. इस कॉलेज पर जिम्‍मेदारी है कि वो सर्जिकल एजुकेशन में सर्वश्रेष्‍ठ डॉक्‍टरों को आगे बढ़ाए. महर्षि सुश्रुत को फादर ऑफ सर्जरी कहा जाता है. रॉयल ऑस्‍ट्रेलिया कॉलेज ऑफ सर्जन ने दुनिया को बेहतरीन डॉक्‍टर दिए हैं. आरएससीएस ने ऑस्‍ट्रेलिया में हिंदु काउंसिल को दिए इंटरव्‍यू में कहा था कि कॉलेज की बिल्डिंग में महर्षि सुश्रुत की मूर्ति उनके लिए गौरव की बात है.

जून 2018 में लगाई गई थी मूर्ति

जून 2018 में इस मूर्ति को यहां पर लगाया गया था. संगमरमर की मूर्ति को ग्रेनाइट के बेस पर रखा गया है. यह मूर्ति 1.2 मीटर ऊंची और 550 किलोग्राम की है और स्किल लैब एरिया में है. कॉलेज में ऐसी कई प्रमुख और दुर्लभ किताबों को भी सहेजकर रखा गया है जो मेडिकल हिस्‍ट्री से जुड़ी हैं. इन्‍हीं किताबों में महर्षि सुश्रुत की तरफ से लिखी गई ‘सुश्रुत संहिता’ का इंग्लिश ट्रांसलेशन भी मौजूद है जो सन् 1907 में आया था. कॉलेज की तरफ से कहा गया है कि सुश्रुत, भारतीय मेडिसन और सर्जरी के क्षेत्र की नींव रखने वाले व्‍यक्ति थे. ‘सुश्रुत संहिता’ को सर्जरी का वेद करार दिया जाता है. म‍हर्षि सुश्रुत के में न ही आज के जैसी लैब्‍स थीं और न ही उपकरण लेकिन उन्‍होंने अपने ज्ञान से कई उपकरणों की खोज की ताकि ऑपरेशन करने में आसानी हो.

डिलिवरी से लेकर मोतियाबिंद का ऑपरेशन

माना जाता है कि उन्‍होंने 2600 साल पहले डिलिवरी , मोतियाबिंद, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई तरह की मुश्किल सर्जरी को पूरा किया था. मॉर्डन साइंस के मुताबिक 400 साल पहले ही सर्जरी के बारे में दुनिया को पता लगा था. लेकिन सुश्रुत ने कई हजार साल पहले इस काम को करके दिखा दिया था. कहते हैं कि सुश्रुत के पास अपने बनाए उपकरण थे जिन्हें वो उबालकर प्रयोग करते थे. ‘सुश्रुत संहिता’ सर्जरी से जुड़ी कई जानकारियां मौजूद हैं. इसमें चाकू, सुइयां, चिमटे के अलावा 125 से भी ज्‍यादा सर्जरी इंस्‍ट्रूमेंट्स के बारे में लिखा है. इस ग्रंथ में करीब 300 तरह की सर्जरियों का जिक्र ह‍ै.

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