कम्ब रामायण

  • जितनी विविध कथाएं, संस्करण, प्रकरण, आदि रामायण के भारतीय उपमहाद्वीप और एशियाई राष्ट्रों में मिलते हैं, वैसी व्यापकता किसी और काव्य की अलभ्य है।
  • 9वीं शताब्दी में कम्बन रचित रामायण में सियाराम के अयोध्या आगमन और भ्रातृप्रेम के प्रसंग समाए हैं, जो वाल्मीकि से मानस तक कहीं मौजूद नहीं हैं।
  • कम्ब रामायण सम्भवत: आधुनिक भारतीय अहिंदी भाषाओं में सबसे पहला श्रीरामकथा महाकाव्य है। इसकी रचना 9वीं शती में महर्षि कम्बन ने तमिल भाषा में की थी। इसमें रावण वध करके श्रीराम के लंका से अयोध्या लौटने का वर्णन अन्य श्रीरामकथाओं से अलग एवं भ्रातृप्रेम से ओत-प्रोत है। कम्ब रामायण के युद्धकाण्ड से श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड में अयोध्या आगमन के वर्णन में भिन्नता दिखाई देती है। कहीं-कहीं यह प्रसंग पाठकों के अन्तर्मन को उद्वेलित कर देता है।
  • प्रसंग इस प्रकार है कि रावण वध के बाद भगवान श्रीराम पुष्पक विमान से वापस आ रहे हैं। विजय के उल्लास से सभी भरे थे। सभी शीघ्रातिशीघ्र अयोध्या लौटना चाहते थे। कम्ब रामायण के अनुसार अशोक वाटिका में सीताजी का विशेष ध्यान रखने वाली त्रिजटा को सीताजी आशीर्वाद देती हैं कि तुम संकट रहित हो। अब तुम लंका में देवी के समान रहो। पुष्पक विमान अंडाकार था और अनेक लोगों के बैठने पर भी ख़ाली रहता था। श्रीराम ने विभीषण को सलाह दी कि तुम लंका पर राज्य करते हुए अपने देशवासियों की प्रशंसा के पात्र बनो। श्रीराम ने सुग्रीव, जाम्बवान, नील तथा हनुमान आदि सभी वानर समूहों को अपने-अपने स्थान पर लौट जाने को कहा तो वे सभी रोने लगे और दु:खी हो गए। सुग्रीव आदि वानरों ने कहा कि हम आपका अयोध्या में राज्याभिषेक का उत्सव देखना चाहते हैं। इस उत्सव को देखकर ही हमारी थकान दूर होगी-
  • पार मामदि लयोत्तियि नय्दिनिन् पैम्बान्
  • आर मामुदिक् कोलमुअ् जब्वियु मळ्हुम्
  • शोर्वि लादियाड गाणगुरु मळवैयुन दौडर्न्दु
  • पेर वेयरु ळनर्न रुळळनबु पिणिप्पार्
  • कम्ब रामायण — तमिळ युद्धकाण्ड उत्तरार्द्ध 4045 )
  • श्रीराम ने उन सभी को विमान में बैठा लिया। श्रीराम सीताजी सहित पुष्पक विमान में सुशोभित दिखाई दे रहे हैं। सीताजी पूछती हैं कि हनुमान आपको कहां मिले। श्रीराम कहते हैं कि यहीं किष्किंधा में। यह सुनकर सीताजी कहती हैं कि विमान में पुरुषों की संख्या अधिक है। अयोध्या पहुंचूंगी तो मेरे स्त्रीत्व की कमी मानी जाएगी। यदि पुष्प गुच्छों से सुसज्जित केश वाली तन्वियां साथ रहेंगी तो उचित रहेगा।
  • सुग्रीव ने हनुमानजी से कहकर असीम वानरियों को बुला भेजा। वे सभी स्त्रीत्व के शृंगार में सीताजी के सम्मुख उपस्थित हो गईं और नमस्कार करके उनके चारों ओर खड़ी हो गईं। पुष्पक विमान चलता गया। भरद्वाज आश्रम आया। विमान आता देख गुरु भरद्वाज उनके स्वागत के लिए संतों के साथ आगे आए। पुष्पक विमान वहां रुका। श्रीराम ने ऋषि भरद्वाज के चरणों में नमस्कार किया। मुनिवर ने उन्हें उठाया और उनकी जटा की धूल हटाई। विमान स्थित सभी यात्रियों ने गुरु वंदन किया।
  • गुरुजी उन्हें आश्रम में लाए और प्राचीन स्मृतियों का स्मरण किया। उन्होंने सूचित किया कि भरत फलाहार लेते हैं और घास की शय्या पर सोते हैं। भरद्वाज मुनि ने वानर दलों को आशीर्वाद दिया कि उन्हें हमेशा जल, मधु, कन्द, मूल, फल मिलते रहें। उन्होंने श्रीराम से कहा कि वे यहां अपनी सम्पूर्ण सेना के साथ भोजन ग्रहण करें।
  • श्रीराम ने हनुमान जी को भाई भरत के पास जाने को कहा कि तुम जाकर हमारे आगमन की सूचना दो। भरत के बारे में जानकारी लेकर यहां आ जाना। मेरे समय पर न पहुंचने पर वह दु:खी है। श्रीराम ने हनुमानजी को एक अंगूठी दी कि तुम भरत को यह दे देना।
  • ‘इन्रु नाम्बदि वरदुमुन् मारुदि यीण् डच्
  • चन्रु तीदिन् मैं शप्पियत् तीयवित् तीळयोन्
  • निन्र नीर्मैयु निनैवुनी तेर्नदम्मि नेर्दल्
  • नन्र नाववन् मोदिरङ् गैकाडु नडन्दान्’
  • कम्ब रामायण — तमिल युद्धकाण्ड उत्तरार्द्ध 4088 )
  • श्रीराम नियत समयावधि में अयोध्या नहीं पहुंचे तो भरतजी ने सोचा किसी घटनावश वे नहीं आए हैं। व्यग्रता बढ़ने लगी। उन्होंने शत्रुघ्न को बुलाने को कहा। शत्रुघ्न के आने पर उसे गले लगाया। श्रीराम नहीं आए हैं, इसलिए मैं जलती आग में कूदकर प्राण त्याग दूंगा। तुम राजा बन जाओ। छोटे भाई ने कहा कि क्या मैं निर्लज्ज होकर राजा बनूंगा। कौशल्या समाचार सुनकर विलाप करती हुई आईं। अन्य अयोध्यावासी भी वहां आए।
  • कौशल्या ने कहा ऐसा मत सोचो। आज नहीं तो कल वह अवश्य आएंगे। भरत अग्नि के निकट पहुंच गए। इतने में भीड़ में हनुमानजी ने ज़ोर से कहा, आर्य पधार चुके हैं। हनुमानजी ने आग बुझा दी और बोले कि अभी दिन बीत जाने में चालीस घड़ी शेष है। सूर्य उदयगिरि पर उदित न हो तब तक मेरी बात पर विश्वास कीजिए। यदि यह समय बीत गया तो आप क्या सारा लोक नष्ट हो जाएगा। भरद्वाज आश्रम के मधुर भोज के कारण श्रीराम को वहां रुकना पड़ा। श्रीराम ने आपके लिए यह अभिज्ञान दिया है। अंगूठी को भरतजी ने माथे पर लगाया। उनका कृशकाय शरीर एकदम फूल गया। भरत आनंदित हो गए। भरत हनुमानजी से पूछते हैं कि ब्राह्मणवेशधारी आप कौन हैं?
  • हनुमानजी उन्हें अपना परिचय देते हैं और ब्राह्मण वेश छोड़ भव्य रूप धारण कर लेते हैं। सभी उन्हें विस्मय से देखते हैं। भरत उनसे कहते हैं कि आप पर्वताकार रूप बदलकर छोटा रूप धारण कर लीजिए। भाई शत्रुघ्न से कहा कि अयोध्या की सजावट करो और श्रीराम के आगमन की मुनादी पिटवा दो। पुष्पक विमान का आगमन हुआ। सभी अतिहर्ष से मिले और श्रीराम, भरत, माताओं, गुरुओं सभी अयोध्यावासियों का मिलन हुआ।
  • श्रीरामचरितमानस में हमें श्रीराम का हनुमानजी को भरतजी के लिए अंगूठी देने का वर्णन नहीं मिलता है। भरतजी का अग्नि में कूदने जाने का वर्णन भी अन्यत्र नहीं है। पुष्पक विमान में सीताजी अपने स्त्रीत्व के लिए वानरियों को बैठाने को कहती हैं, यह वर्णन भी श्रीरामचरितमानस में नहीं है। अंगूठी के प्रभाव से भरत का दौर्बल्य समाप्त होना भी एक आश्चर्यजनक घटना है।
  • श्रीरामचरितमानस में समस्त माताएं अयोध्यापुरी के द्वार पर श्रीराम के स्वागत में तत्पर रहती हैं, किंतु कम्ब रामायण में कौशल्या नंदीग्राम में भरत के अग्नि प्रवेश का समाचार सुनकर विलाप करते हुए अयोध्यावासियों के साथ आती हैं।
  • सुधीजन को कम्ब रामायण के युद्धकाण्ड का उत्तरार्द्ध एक अलग कथानक के साथ पढ़ने को प्राप्त होता है।

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