रामायण के सच होने के 10 सबूत

1. अयोध्या का हनुमानगढ़ी – माना जाता है कि श्रीराम की प्रतीक्षा हनुमान इसी स्थल पर करते थे। राम निवास अयोध्या में एक प्राचीन हनुमान मंदिर है, जिसे हनुमानगढ़ी के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को यह जगह रहने को दिया था,जिसके कारण इसे हनुमान जी का घर भी कहा जाता है। मान्यता है कि श्रीराम के दर्शन के पूर्व अयोध्या में श्री हनुमान जी के दर्शन हनुमानगढ़ी में करने से मनोकामना जल्दी पूरी होती है। रामायण में भी हनुमानगढ़ी का उल्लेख किया गया है।

2. हनुमान जी के विशाल पद चिन्ह – रावण द्वारा सीता हरण के बाद जब हनुमान जी माता सीता की खोज में श्रीलंका पहुंचने के लिए समुद्र को पार करने हेतु एक विशाल रूप धारण किये। तब उनके विशाल पद चिन्ह के छाप श्रीलंका के स्थल पर अंकित हो गए। यह अभी रामायण के साक्ष्य को दर्शाता है।

3. सांप के समान शिरानुमा गुफा-रामायण के अनुसार रावण द्वारा सीता का अपहरण करके श्रीलंका में सबसे पहले एक गुफा में रखा गया था। इस गुफा का शीष और इसके चारों ओर की नक्काशी कोबरा सांप की तरह दिखाई देता है। इसकी उपस्थिति भी रामायण के सबूत बताते हैं।

4. रावण का महल-लंका में रावण का महल था, जिसमें वह अपनी रानी मंदोदरी के साथ रहता था। हनुमान जी ने अपने पूछ से रावण की इस विशाल सोने की लंका को जला दिया था। जिसके जले हुए अवशेष आज भी श्रीलंका में देखने को मिलती है।

5. अशोक वाटिका/सीता एलिया

रामायण ग्रन्थ के अनुसार माता सीता को अपहरण के बाद जब माता ने लंका में जाने से मना कर दिया, तब रावण ने लंका की अशोक वाटिका में उन्हें रखा था। अशोक वाटिका में व्यापक मात्रा में अशोक वृक्ष थे, यहीं पर एक वृक्ष के नीचे माता सीता रहती थी। इस जगह को अब सीता एलिया नाम से जाना जाता है, जो वर्तमान में श्रीलंका में स्थित है।

6. गर्म जल के कुएं-रामायण बताया गया है कि रावण ने अपने दानवीय शक्तियों के प्रमाण के लिए लंका में गर्म जल के कुएं बनवाए थे। इससे गर्म पानी निकलता है, जो आज भी श्रीलंका में देखने को मिल जाएगी।

7. रामसेतु का निर्माण-भारत से श्रीलंका की ओर के लिए राम और उनकी सेना ने पत्थरों को समुद्र में फेंक राम सेतु का निर्माण किया था। इन राम सेतु पुल के सहायता से सभी वानर सेना लंका में प्रवेश कर पाए थे। कहा जाता है कि जिन पत्थरों से रामसेतु पुल बनाया गया था, वह पत्थर आज भी समुद्र में तैरते हुए दिखाई देते हैं। जिसमें श्रीराम का नाम लिखा हुआ है। नासा ने भी अपने एक शोध के बाद बताया है कि यह रामसेतु मानव द्वारा निर्मित है।

8. द्रोणागिरी पर्वत-रामायण के कथा में उल्लेख किया गया है कि लक्ष्मण और मेघनाथ के युद्ध में मेघनाथ के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, उनका बचना लगभग असंभव माना जा रहा था। तब राजवैद्य सुरोन के उपाय के अनुसार द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाना था। किन्तु हनुमान जी ने पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा ले आये। जिसमे से संजीवनी बूटी निकाल कर लक्ष्मण के प्राण की रक्षा की गई। माना जाता है कि संजीवनी बूटी में इतनी शक्ति है कि वो मरने वाले व्यक्ति की प्राण को भी बचा सकता है। लक्ष्मण जी के ठीक होने के बाद हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत उसी स्थान पर रख दिया, जो आज भी उत्तराखंड के चमोली गांव में स्थित है।

9. लेपाक्षी मंदिर-सीता हरण के बाद रावण माता सीता को जिस मार्ग से लंका ले जा रहे थे, उस मार्ग पर राम भक्त जटायु ने रावण को रोकने के लिए युद्ध किया, लेकिन रावण ने जटायु के दोनो पँख काट के उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। जिसके बाद वो घायल अवस्था में श्रीराम के सामने गिरे और उनकी गोद में ही अपना शरीर त्याग दिया। जिस स्थल पर जटायु गिरे, वहां लेपाक्षी मंदिर का निर्माण किया गया। जो आज भी आंध्र प्रदेश में देखा जा सकता है।

10. पंचवटी-मान्यता है कि जब राम, लक्ष्मण और सीता वनवास के लिए निकले थे, तो वह नासिक पंचवटी जंगल में रहते थे। इस जंगल में लक्ष्मण ने रावण की बहन सुपनखा की नाक काट दिए थे। यह पंचवटी वन आज भी नासिक में है।

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