असली हिन्दू कौन है ?

धार्मिक और आध्यात्मिक विचारधारा में, हिंदू शब्द वह व्यक्ति या समुदाय को दर्शाता है जो हिंदू धर्म का अनुसरण करता है और वेदान्त, उपनिषद, पुराण, रामायण, महाभारत आदि मान्यताओं को मान्यता प्रदान करता है। हिंदू धर्म में अनेक भक्तिसंप्रदाय, दर्शन, मतवाद और सम्प्रदाय हैं जो विभिन्न साधना पथों और आचार्यों के माध्यम से अपनाये जाते हैं।

हिंदू धर्म एक अत्यंत विविध और परंपरागत धर्म है, और उसमें कई जातियों, क्षेत्रों, भाषाओं और संप्रदायों के लोग शामिल हैं। हिंदू धर्म में जन्म और पालन द्वारा व्यक्ति हिंदू धर्म के सदस्य बन जाता है। इस प्रकार, हिंदू धर्म की अद्यतित और व्यापक परिभाषा के अनुसार, हिंदू धर्म के अनुसार जन्म, आचरण, और आदर्शों का पालन करने वाले व्यक्ति को हिंदू माना जाता है।

असली हिन्दू कौन है?| हिन्दू कहने का हकदार कौन है?

स्वयं को हिन्दू कहने का हक़ मात्र उस व्यक्ति को है जिसे हिन्दू धर्म के शीर्षतम ग्रन्थों जैसे उपनिषद, वेदान्त और गीता का ज्ञान हो! अर्थात एक असली हिन्दू वह है जो सनातन धर्म के उच्चतम दर्शन से परिचित हों, और उन्हें पूजकर (अर्थात दिल से जिनका पालन) करता हो।

यह बात समझ से परे है की एक मुसलमान बाइबल पढता है, सिक्ख गुरुवाणी पढता है, पर हिन्दू को न गीता से मतलब होता है न उपनिषदों से.. ये बड़ी विडम्बना है इसलिए खतरा है हिन्दू धर्म को हिन्दुओं से।

जिसकी हिन्दू दर्शन में रूचि न हो, जिसने कभी हिंदुत्व का मर्म नहीं जाना वह इंसान क्या सिर्फ हिन्दू परिवार में जन्म होने से खुद को हिन्दू कह सकता है! नहीं न, हिन्दू होना क्या जींस की बात है?

जिस तरह एक वैज्ञानिक को विज्ञान के कारण सम्बोधित किया जाता है , उसी तरह जिसे  कृष्ण से, शिव से प्रेम है मात्र उनके समक्ष सर झुकाकर प्रणाम करने से बात नहीं बनेगी बल्कि ऐसा व्यक्ति श्रीमद भगवद गीता, शिव गीता का भी अध्ययन करेगा।

इसलिए करोड़ों हिन्दुओं में से आप ढूँढने निकलेंगे तो मात्र कुछ ही लोग होंगे जो सनातनी होने का अर्थ समझते होंगे, बाकी सभी लोग धर्म के नाम पर बस हो हल्ला, शोर शराबा करते नजर आयेंगे।

ऐसे लोगो की आस्था अक्सर खोखली साबित होती है, ये लोग फिर धर्म को अपनी मनोकामना/इच्छा की पूर्ती का साधन बना लेते हैं! ये धर्म और भगवान को इसलिए पूजते हैं ताकि ईश्वर उनकी रक्षा कर सके और उन्हें सुख दे सके।

ऐसे लोग अज्ञानी होते हैं क्योंकी जो व्यक्ति वेदान्त नहीं जानता उसे न मन के बारे में पता होगा न आत्मा के, ऐसा व्यक्ति न प्रकृति को समझेगा न ईश्वर को, अतः यही वजह है की फिर कई सारे तथाकथित धार्मिक लोग घोर अन्धविश्वासी होते हैं।

सनातन धर्म के प्रमुख ग्रन्थ जो आपको जरुर पढने चाहिए:-

1. वेदांत

2. उपनिषद

3. भगवद गीता

4. अष्टावक्र गीता

परम्पराओं को मानने का नाम हिन्दू धर्म नहीं है|

अधिकांश लोग जिन परम्पराओं में गहरी आस्था रखते हैं, और उनका पालन करते हैं उसे मनाने की वजह क्या थी उन्हें पता नहीं होता! और न ही वह जानते की कोई भी परम्परा शाश्वत होती है।

अगर इन परम्पराओं को अंधाधुंध मानना ही सनातन धर्म है तो बताइए कौन सी परम्परा का पालन आदिकाल से किया जा रहा है, उदाहरण के लिए पहले करवा चौथ सिर्फ पंजाब में मनाया जाता था।

पर बॉलीवुड और मीडिया की वजह से आज यह त्यौहार उत्तर भारत विशेषकर यूपी, बिहार में भी खूब मनाया जाता है, इस मौके पर कुँवारी स्त्रियाँ नाचती हैं और नए अंदाज में आज यह पर्व मनाया जा रहा है।

तो इस प्रकार देखा जाए तो परम्पराएं तो बदलती रहती हैं, लोग पहले लकड़ी के चप्पलों पर चलना शुभ समझते थे पर आज तकनीक और सुविधाओं की वजह से लोग चमड़े के चप्पलों से चलते हैं।

अतः परम्पराएं सनातन धर्म नहीं हैं, इस बात का प्रमाण हमें इस बात से मिल जाता है की जिन परम्पराओं का पालन हमारे पूर्वज करते थे आज आप उनका बिलकुल भी समर्थन और पालन नहीं करते।

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